इन मूक प्राणियों की जीने इच्छा को देखते हुए उनके संरक्षण हेतु "संत शिरोमणि आचार्य गुरुवार श्री विद्यासागर महाराज जी के परम प्रभावक शिष्य समता शिरोमणी १०८ श्री नियमसागर जी महाराज जी, १०८ श्री वृषभ सागरजी महाराजजी एवं १०८ सुपार्श्व सागरजी महाराजजी के सानिध्य में पूना (निगड़ी) में हुए २०१२ के चातुर्मास में संपूर्ण जैन समाज को एकत्र करने एवं उनकी प्रेरणा से गौ रक्षा का संकल्प लिया ।
कत्तलखानो में जा रहे मूक पशुओं को बचाने में
बूढ़ी गायों को गौशाला में सुरक्षित पहुँचाने के लिए परिवहन खर्च
जरुरत मंद गौशालाओ को चारा, घास, खाद्य व औषधि के लिए मदद करने में
वर्तमान में चल रही गौशाला के विस्तारीकरण व आधुनिकीकरण करने में
स्वयं की एक गौशाला निर्माण करने के संकल्प की और आगे बढ़ने मे